जमालपुर (मुंगेर), 30 जनवरी 2026-आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में केवल पाठ्यक्रम आधारित ज्ञान पर्याप्त नहीं रह गया है। बदलते सामाजिक, मानसिक और भावनात्मक परिवेश में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए जीवन कौशल (Life Skills) का समावेश अनिवार्य हो चुका है। इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए सरस्वती विद्या मंदिर, दौलतपुर, जमालपुर में आज जीवन कौशल पर आधारित एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया, जिसने शिक्षकों को नई दृष्टि, नई दिशा और नई ऊर्जा प्रदान की।इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा चयनित प्रतिष्ठित रिसोर्स पर्सन रवि प्रकाश पाठक एवं आकांक्षा ने संयुक्त रूप से किया। सत्र में विद्यालय के कुल 40 आचार्यों एवं आचार्याओं ने सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई और आधुनिक शिक्षण प्रणाली में जीवन कौशलों की भूमिका को गहराई से समझा।इस प्रशिक्षण सत्र का मूल उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे व्यवहारिक एवं मनोवैज्ञानिक कौशलों से लैस करना था, जिन्हें वे न केवल स्वयं अपने जीवन में अपनाएं, बल्कि कक्षा-कक्ष में छात्रों तक प्रभावी रूप से पहुँचा सकें। जीवन कौशलों में विशेष रूप से आत्मविश्वास निर्माण, तनाव प्रबंधन, प्रभावी संवाद, समस्या समाधान, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, नेतृत्व क्षमता, निर्णय लेने की योग्यता और सहानुभूति जैसे पहलुओं पर गहन चर्चा की गई।CBSE के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप आयोजित इस कार्यशाला में पारंपरिक व्याख्यान के बजाय इंटरैक्टिव सेशन, समूह चर्चा, केस स्टडी, रोल-प्ले और व्यावहारिक गतिविधियों को प्रमुखता दी गई। इससे शिक्षकों को न केवल सैद्धांतिक जानकारी मिली, बल्कि उन्होंने इन कौशलों को व्यवहार में उतारने के तरीकों को भी प्रत्यक्ष रूप से अनुभव किया।CBSE द्वारा जीवन कौशल आधारित प्रशिक्षणों को बढ़ावा देना इस बात का संकेत है कि अब शिक्षा बोर्ड भी यह स्वीकार कर चुका है कि विद्यार्थियों की सफलता केवल अंकों से नहीं, बल्कि उनके मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक संतुलन से तय होती है। आज के प्रतिस्पर्धात्मक युग में बच्चों को केवल परीक्षा उत्तीर्ण कराना ही लक्ष्य नहीं, बल्कि उन्हें जीवन की चुनौतियों का सामना करने के लिए सक्षम बनाना भी शिक्षा का अनिवार्य दायित्व है।इस संदर्भ में आयोजित यह सत्र शिक्षकों के लिए एक री-ओरिएंटेशन प्रोग्राम के रूप में सामने आया, जिसमें उन्हें यह समझाया गया कि शिक्षक की भूमिका केवल विषय पढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि वह छात्रों के व्यक्तित्व निर्माण में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है।CBSE चयनित रिसोर्स पर्सन रवि प्रकाश पाठक ने अपने संबोधन में कहा,आज का आचार्य केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि भैया-बहनों के सर्वांगीण विकास का पथप्रदर्शक होता है। जीवन कौशल ही वह सेतु हैं, जो किताबी शिक्षा को वास्तविक जीवन से जोड़ते हैं।”उन्होंने कहा कि जब तक शिक्षक स्वयं इन कौशलों को नहीं अपनाएंगे, तब तक छात्रों में उनका विकास संभव नहीं है। उन्होंने कक्षा-कक्ष के वास्तविक उदाहरणों के माध्यम से बताया कि कैसे छोटे-छोटे बदलाव शिक्षण शैली को अधिक प्रभावी बना सकते हैं। उनका सत्र शिक्षकों के लिए अत्यंत प्रेरणादायक और आत्ममंथन का अवसर साबित हुआ.रिसोर्स पर्सन आकांक्षा ने अपने सत्र में विशेष रूप से भावनात्मक बुद्धिमत्ता (Emotional Intelligence) और सहानुभूति (Empathy) पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षक यदि स्वयं मानसिक रूप से संतुलित, संवेदनशील और सकारात्मक होंगे, तभी वे बच्चों के भीतर इन गुणों का विकास कर पाएंगे।उन्होंने वास्तविक जीवन की घटनाओं और अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि कैसे एक संवेदनशील शिक्षक छात्रों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। उनके सत्र ने शिक्षकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि कई बार बच्चों के व्यवहार के पीछे छिपे कारणों को समझना, दंड देने से कहीं अधिक प्रभावी होता है।इस प्रशिक्षण सत्र में विद्यालय के प्रधानाचार्य छठु साह एवं उप-प्रधानाचार्य संतोष कुमार ने न केवल उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि पूरे सत्र में सक्रिय सहभागिता भी निभाई। प्रधानाचार्य छठु साह ने अपने संबोधन में कहा,हमारा विद्यालय सदैव शिक्षा को जीवन-उन्मुख बनाने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। CBSE द्वारा चयनित विशेषज्ञों के माध्यम से आयोजित यह सत्र हमारे आचार्यों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा और इसका सकारात्मक प्रभाव निश्चित रूप से कक्षा-कक्ष में दिखाई देगा।”उन्होंने यह भी कहा कि विद्यालय भविष्य में ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को नियमित रूप से आयोजित करने के लिए प्रयासरत रहेगा।उप-प्रधानाचार्य संतोष कुमार ने सत्र को समय की आवश्यकता बताते हुए कहा कि आज की पीढ़ी को केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन में संतुलन और जिम्मेदारी का पाठ पढ़ाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इस पहल को विद्यालय के शैक्षणिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।कार्यक्रम में विशेष अतिथि के रूप में सरस्वती शिशु मंदिर, मुंगेर पथ की प्रधानाचार्या किरण कुमारी की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया। उन्होंने प्रशिक्षण सत्र की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम न केवल शिक्षकों को सशक्त बनाते हैं, बल्कि पूरे शैक्षणिक वातावरण को सकारात्मक दिशा प्रदान करते हैं।उन्होंने आशा व्यक्त की कि मुंगेर जिले के अन्य विद्यालय भी इस प्रकार के जीवन कौशल आधारित प्रशिक्षणों को अपनाएंगे, जिससे पूरे क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।सत्र में भाग लेने वाले शिक्षकों ने इसे अपने पेशेवर जीवन का एक महत्वपूर्ण अनुभव बताया। कई शिक्षकों ने कहा कि इस प्रशिक्षण ने उन्हें अपनी शिक्षण शैली पर पुनर्विचार करने का अवसर दिया। शिक्षकों का मानना था कि जीवन कौशलों को कक्षा में शामिल करने से छात्रों में न केवल अकादमिक सुधार होगा, बल्कि उनका आत्मविश्वास और सामाजिक व्यवहार भी सुदृढ़ होगा।यह प्रशिक्षण सत्र सरस्वती विद्या मंदिर परिवार के लिए गर्व का विषय रहा। कार्यक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया कि विद्यालय शिक्षा को केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित नहीं रखता, बल्कि वह विद्यार्थियों को एक जिम्मेदार, संवेदनशील और सक्षम नागरिक के रूप में तैयार करने के लिए प्रतिबद्ध है।विद्यालय प्रबंधन ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी रिसोर्स पर्सन, अतिथियों और प्रतिभागी शिक्षकों का हार्दिक आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी ऐसे रचनात्मक एवं नवाचारपूर्ण प्रयास जारी रखने का संकल्प दोहराया।सरस्वती विद्या मंदिर, जमालपुर में आयोजित यह जीवन कौशल प्रशिक्षण सत्र न केवल एक कार्यशाला था, बल्कि यह शिक्षा के बदलते स्वरूप का जीवंत उदाहरण भी था। इसने यह संदेश दिया कि जब शिक्षक स्वयं सीखने और बदलने के लिए तैयार होते हैं, तभी वे छात्रों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन ला सकते हैं।निस्संदेह, यह आयोजन मुंगेर जिले की शिक्षा व्यवस्था में एक प्रेरणास्पद और दूरगामी प्रभाव वाला कदम साबित होगा।
