दौलतपुर (जमालपुर), 30 मार्च 2026 — सरस्वती विद्या मंदिर, दौलतपुर, जमालपुर में सोमवार को वार्षिकोत्सव “सृजन” अत्यंत भव्यता और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। यह आयोजन संघ के शताब्दी वर्ष को समर्पित था, जिसमें भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रभक्ति की झलक साफ दिखाई दी। पूरे विद्यालय परिसर में उत्सव जैसा माहौल रहा, जहां छात्र-छात्राओं, अभिभावकों और अतिथियों की भारी उपस्थिति ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत विधिवत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। मुख्य अतिथि एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप जलाकर माँ सरस्वती के चरणों में नमन किया और कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इसके पश्चात सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई, जिसने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। प्रधानाचार्य छठु साह द्वारा अतिथियों का परिचय कराया गया, जबकि बहन मोहिता और सिमरन ने मधुर स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का अभिनंदन किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि सहायक थाना प्रभारी, जमालपुर सत्तो पासवान ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को अनुशासन, देशभक्ति और नैतिक मूल्यों का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि आज के समय में शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि विद्यार्थियों के चरित्र निर्माण और उनके व्यक्तित्व के समग्र विकास पर भी ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने विद्यालय द्वारा आयोजित इस तरह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की सराहना करते हुए कहा कि ये बच्चों में छिपी प्रतिभा को उजागर करने का सशक्त माध्यम हैं।
कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने एक से बढ़कर एक मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। वाटिका खंड के नन्हे-मुन्ने बच्चों — रौनक, अर्पिता, नव्या, सुयांश, दक्ष, पार्थ झा, मान्या, अंकुर और यक्षित ने “शिशु मंदिर योजना के 12 आयाम” पर आधारित समूह नृत्य प्रस्तुत किया, जिसने सभी का दिल जीत लिया। उनकी मासूमियत और तालमेल ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके अलावा “फास्ट फूड एक्ट” में प्रिंस, जीवा, आसना, वैष्णवी, आस्था, आरोही और तिरिशा ने आधुनिक जीवनशैली और उसके प्रभावों को मनोरंजक तरीके से प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति के माध्यम से बच्चों ने यह संदेश दिया कि जंक फूड के बढ़ते चलन से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है और हमें संतुलित आहार अपनाना चाहिए।
महाभारत की द्रौपदी चीर हरण की घटना पर आधारित सामूहिक नृत्य ने कार्यक्रम में भावनात्मक गहराई जोड़ दी। शिवांगी, प्रगति, दिव्यांशी, अंकिता, पीहू, आयशा और सुप्रिया ने अपने अभिनय और नृत्य के माध्यम से इस ऐतिहासिक प्रसंग को जीवंत कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को झकझोर दिया और समाज में नारी सम्मान के महत्व को रेखांकित किया।
योग और पर्यावरण संरक्षण पर आधारित नृत्य भी कार्यक्रम के प्रमुख आकर्षण रहे। आराध्या, अनिका, रेयांशी, आरव, साकेत, वैभव शर्मा और सोनाक्षी ने पर्यावरण जागरूकता पर आधारित नृत्य प्रस्तुत कर प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। वहीं रानी, समीक्षा, आंसु, मन्नू, रक्षा, सृष्टि, रिया और पीहू ने योग की महत्ता को दर्शाते हुए स्वास्थ्य और संतुलित जीवनशैली का संदेश दिया।
विद्यालय की ओर से प्रस्तुत नाटक “समरसता” ने कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई प्रदान की। इस नाटक के माध्यम से सामाजिक एकता, भाईचारा और समानता का संदेश दिया गया। आयुष, सुमंत, आर्यन, प्रिंस और समक्ष ने अपने सशक्त अभिनय से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। नाटक ने यह संदेश दिया कि समाज में भेदभाव की कोई जगह नहीं होनी चाहिए और सभी को मिलकर एक समरस समाज का निर्माण करना चाहिए।
विशिष्ट अतिथि विद्या भारती के अखिल भारतीय मंत्री प्रो. (डा.) कमल किशोर सिन्हा ने अपने संबोधन में विद्या भारती की शिक्षा प्रणाली की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्या भारती का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि ऐसे नागरिक तैयार करना है जो भारतीय संस्कृति, परंपरा और मूल्यों से जुड़े हों। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीयता का समन्वय ही सच्ची शिक्षा है।
कार्यक्रम का मंच संचालन आचार्या पूनम कान्ति के निर्देशन में प्रथमेश, सिमरन और मोहिता द्वारा अत्यंत कुशलता के साथ किया गया। उनकी प्रस्तुति और संचालन शैली ने पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित और आकर्षक बनाए रखा।
अध्यक्षीय उद्बोधन में जिला निरीक्षक वीरेन्द्र कुमार ने विद्यालय की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान न केवल शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों के प्रसार में भी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और निरंतर मेहनत करने की प्रेरणा दी।
शिशु मंदिर, मुंगेर पथ की प्रधानाचार्या किरण कुमारी ने अपने संबोधन में कहा कि सरस्वती विद्या मंदिर जैसे संस्थान बच्चों को एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि यहां दी जाने वाली शिक्षा बच्चों को न केवल ज्ञानवान बल्कि संस्कारवान भी बनाती है। उन्होंने बच्चों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों से बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है।
विद्यालय के उप-प्रधानाचार्य संतोष कुमार ने कहा कि “सृजन” जैसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब पश्चिमी संस्कृति का प्रभाव बढ़ रहा है, ऐसे में इस प्रकार के आयोजन भारतीय संस्कृति को जीवित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के सचिव चंद्रशेखर खेतान द्वारा धन्यवाद ज्ञापन किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, अभिभावकों और उपस्थित जनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना इस तरह के भव्य आयोजन संभव नहीं हो सकते। कार्यक्रम का समापन “वंदे मातरम” के सामूहिक गान के साथ हुआ, जिसने पूरे वातावरण को देशभक्ति से भर दिया।
इस भव्य आयोजन में विद्यालय के अध्यक्ष डॉ. बच्चन सिंह, उपाध्यक्ष रतन घोष, सचिव चंद्रशेखर खेतान, कोषाध्यक्ष सुधीर सिंह, विभाग प्रचारक देवेन्द्र कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इसके अलावा शैल कुमारी, सुप्रिया सुमन, लक्ष्मी, खुशबु कुमारी, पूनम कान्ति, सीमा सिंह, श्वेता गुप्ता, शर्मीली बाला, पियूष कुमार, संजय ठाकुर, हरे कृष्ण नारायण, विवेक कुमार, विनोद सिंह, विपिन चौधरी, उदय कुमार और कमल किशोर सहित नगर के विभिन्न शिशु एवं विद्या मंदिरों के प्रधानाचार्य भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने इस आयोजन की जमकर सराहना की। कई अभिभावकों ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन को धन्यवाद देते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजन करने की अपेक्षा जताई।
कुल मिलाकर “सृजन” केवल एक वार्षिकोत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, शिक्षा और संस्कारों का जीवंत उत्सव बनकर सामने आया। इस कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया कि जब शिक्षा में संस्कृति और मूल्यों का समावेश होता है, तब ही सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण संभव हो पाता है।
