मुंगेर (जमालपुर ):मुंगेर जिले के जमालपुर नगर परिषद क्षेत्र में इन दिनों पेयजल संकट ने विकराल रूप ले लिया है। सरकार की महत्वाकांक्षी “हर घर नल जल” योजना, जिसका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है, यहां जमीनी हकीकत में दम तोड़ती नजर आ रही है। वार्ड संख्या 27 और 31 के सैकड़ों परिवार आज भी पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि स्थानीय महिलाओं को 08 अप्रैल 2026 को सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा।
इस पूरे मुद्दे को लेकर समाजसेवी मनीष मंडल ने खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। उन्होंने न केवल स्थानीय लोगों की समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाया, बल्कि जिलाधिकारी को लिखित आवेदन देकर पूरे मामले की गंभीरता से जांच और समाधान की मांग की है।
प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने खाली बाल्टियां और मटके लेकर सड़कों पर उतरकर प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना था कि जब सरकार हर घर तक पानी पहुंचाने का दावा कर रही है, तो जमालपुर के इन वार्डों को आखिर क्यों नजरअंदाज किया जा रहा है। सड़क जाम के कारण यातायात भी बाधित हुआ, जिसके बाद नगर परिषद के अधिकारी मौके पर पहुंचे और एक सप्ताह में पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
लेकिन समाजसेवी मनीष मंडल का कहना है कि यह आश्वासन अब लोगों के लिए महज औपचारिकता बनकर रह गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार आवेदन देने के बावजूद प्रशासन केवल “जांच” और “प्रक्रिया” के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
आवेदन में बताया गया है कि अमृत योजना 2 के तहत लगभग 15,000 नए कनेक्शन देने की योजना है और इसके लिए डीपीआर भी तैयार है। पानी टंकी निर्माण के लिए चार स्थान चिन्हित किए गए हैं, लेकिन वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के लिए जमीन नहीं मिलने के कारण पूरा प्रोजेक्ट अटका हुआ है।
मनीष मंडल ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि “अगर जमीन की समस्या का समाधान नहीं होता, तो क्या सालों तक जमालपुर की जनता पानी के लिए तड़पती रहेगी? प्रशासन को तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।”
उन्होंने एक महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि जमालपुर रेलवे वर्कशॉप के पास पहले से ही वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट और गंगा से पानी लाने की सुविधा मौजूद है। अगर नगर परिषद रेलवे से एनओसी लेकर इस व्यवस्था का उपयोग करे, तो शहर की बड़ी आबादी को तत्काल राहत मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि जब नगर परिषद रेलवे से टैक्स लेती है, तो यह उसका दायित्व बनता है कि वह ऐसी बुनियादी सुविधा सुनिश्चित करे।
इसके अलावा बुडको द्वारा किए गए कनेक्शनों में भारी अनियमितता का आरोप लगाते हुए मनीष मंडल ने कहा कि कई घरों में एक से अधिक कनेक्शन दिए गए हैं, जबकि कई जरूरतमंद परिवार आज भी पानी से वंचित हैं। उन्होंने मांग की कि सभी कनेक्शनों की जांच कराई जाए और जिन घरों में एक से अधिक कनेक्शन हैं, उन्हें हटाकर जरूरतमंदों को प्राथमिकता दी जाए।
मनीष मंडल ने यह भी सुझाव दिया कि एक होल्डिंग नंबर, आधार कार्ड और होल्डिंग रसीद के आधार पर एक ही कनेक्शन देने की सख्त व्यवस्था लागू की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियां रोकी जा सकें।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए उन्हें बार-बार सड़क पर उतरना पड़ रहा है, जो प्रशासन की विफलता को दर्शाता है। महिलाओं ने बताया कि उन्हें रोजाना दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है, जिससे उनका दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
मनीष मंडल ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो वे स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बड़ा आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि “अब जनता चुप बैठने वाली नहीं है, पानी के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।”
फिलहाल जमालपुर में स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। अब सभी की नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस समस्या को कितनी गंभीरता से लेता है और कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है। क्या “हर घर नल जल” योजना वास्तव में हर घर तक पहुंचेगी, या फिर यह भी कागजों तक ही सीमित रह जाएगी—यह आने वाला समय ही बताएगा।
