मुंगेर।जमाबंदी पंजी में छेड़छाड़ के गंभीर मामले में जिला पदाधिकारी द्वारा मुंगेर सदर अंचल के राजस्व कर्मचारी मोहम्मद रजत को निलंबित किए जाने के बाद मामला और गरमा गया है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बावजूद अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या सिर्फ एक कर्मचारी को सस्पेंड कर पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है?जमाबंदी पंजी जैसे संवेदनशील और नियंत्रित राजस्व अभिलेख में छेड़छाड़ को लेकर यह मानना कठिन है कि यह सब कुछ बिना राजस्व अधिकारी प्रभात कुमार की जानकारी और तत्कालीन अंचलाधिकारी प्रीति कुमारी की प्रशासनिक जिम्मेदारी के संभव हो सकता है। बावजूद इसके अब तक इन दोनों अधिकारियों पर किसी प्रकार की विभागीय कार्रवाई या जांच की घोषणा नहीं की गई है।स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि राजस्व कर्मचारी मोहम्मद रजत और राजस्व अधिकारी प्रभात कुमार के बीच करीबी संबंध रहे हैं। इसी कारण कार्रवाई की आंच ऊपर तक पहुंचते-पहुंचते ठंडी पड़ जाने की आशंका जताई जा रही है। जानकारों का कहना है कि यदि निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई, तो यह मामला भी केवल एक निलंबन तक सीमित रह जाएगा।सबसे गंभीर चिंता यह है कि मामले से जुड़े अहम दस्तावेज और फाइलें अब भी विभाग के भीतर ही मौजूद हैं। यदि समय रहते जमाबंदी रजिस्टर, सहायक पत्रावली और डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित नहीं किया गया, तो इनके साथ छेड़छाड़ या दबाए जाने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।इस बीच मामले ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है। एक भाजपा नेता ने जिला प्रशासन से मांग की है कि निलंबित राजस्व कर्मचारी मोहम्मद रजत,वर्तमान राजस्व अधिकारी प्रभात कुमार,तथा पूर्व अंचलाधिकारी प्रीति कुमारी तीनों की चल-अचल संपत्ति की जांच कराई जाए और उनके कार्यकाल के दौरान किए गए सभी जमाबंदी संशोधनों की गहन समीक्षा हो।भाजपा नेता का कहना है कि,“यदि प्रशासन सिर्फ एक कर्मचारी को सस्पेंड कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान रहा है, तो यह कार्रवाई नहीं बल्कि दिखावा है। जब तक ऊपर के अधिकारियों की भूमिका की जांच नहीं होगी, तब तक सच्चाई सामने नहीं आएगी।”
प्रशासनिक हलकों में भी यह सवाल उठ रहा है कि निलंबन के बाद आगे की कार्रवाई क्या होगी?क्या विभागीय जांच बैठाई जाएगी?क्या उच्चस्तरीय जांच एजेंसी को मामले की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी?या फिर कुछ समय बाद यह मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा?अब पूरा जिला प्रशासन कटघरे में है। मुंगेर की जनता यह जानना चाहती है कि जमाबंदी जैसे गंभीर मामले में कार्रवाई सिर्फ निचले स्तर तक सीमित रहेगी या फिर जिम्मेदार अधिकारियों तक भी पहुंचेगी।
