मुंगेर (जमालपुर)-2026–27 का आम सह रेल बजट जमालपुर रेल नगरी के लिए एक बार फिर धोखा, निराशा और अपमान का दस्तावेज साबित हुआ है। जिस जमालपुर रेल निर्माण कारखाना ने देश के रेल इतिहास को दिशा दी, एशिया में सबसे पहले रेल निर्माण की नींव रखी, उसी कारखाना को केंद्र सरकार ने एक बार फिर नजरअंदाज कर दिया। बजट में जमालपुर को न तो उसका हक मिला, न उसका गौरव लौटाया गया। इसके विरोध में वर्षों से संघर्ष कर रहे जमालपुर रेल निर्माण कारखाना संघर्ष मोर्चा ने सड़कों पर उतरकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का पुतला दहन कर अपना उग्र आक्रोश प्रकट किया.

रेल बजट पेश होते ही जमालपुर में मायूसी और आक्रोश का माहौल बन गया। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि इस बार सरकार एशिया के पहले रेल कारखाना के साथ हुए ऐतिहासिक अन्याय को सुधारेगी। लेकिन हुआ इसके उलट—350 करोड़ रुपये का तथाकथित आवंटन कर सरकार ने जमालपुर को फिर से झुनझुना थमा दिया।संघर्ष मोर्चा के संयोजक सह सपा जिला अध्यक्ष पप्पू यादव के नेतृत्व में सैकड़ों आंदोलनकारी शहर की सड़कों पर उतरे। जुलूस शहर के विभिन्न मार्गों से होता हुआ जुवली वेल चौक पहुंचा, जहां प्रधानमंत्री, वित्त मंत्री और रेल मंत्री के पुतलों को आग के हवाले कर दिया गया।
जमालपुर रेल निर्माण कारखाना संघर्ष मोर्चा जिंदाबाद”
“पूंजीपतियों के दलाल केंद्र सरकार मुर्दाबाद”
“जमालपुर कारखाना की उपेक्षा बंद करो”
“विकास के नाम पर झुनझुना थमाना बंद करो”
“हर जोर-जुल्म के टक्कर में संघर्ष हमारा नारा है”
नारे केवल आवाज़ नहीं थे, बल्कि वर्षों से दबाए गए आक्रोश की गूंज थे।
350 करोड़ : विकास नहीं, कमीशन का बजट
मोर्चा के संयोजक पप्पू यादव ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार ने जमालपुर को 350 करोड़ रुपये देकर यह साबित कर दिया है कि यह बजट विकास का नहीं, बल्कि कमीशनखोरी का बजट है।उन्होंने कहा—“यह 350 करोड़ रुपये जमालपुर के विकास के लिए नहीं हैं। यह सांसदों, मंत्रियों और अधिकारियों की जेब भरने का बजट है। अगर सरकार की नीयत साफ होती तो एशिया के पहले रेल निर्माण कारखाना को निर्माण इकाई का दर्जा मिलता, पूर्व मध्य रेलवे में शामिल करने की घोषणा होती और यहां बड़े स्तर पर रोजगार सृजन होता।”पप्पू यादव ने कहा कि रेल जिला जमालपुर के लोग वर्षों से यह मांग कर रहे हैं कि कारखाना को वास्तविक अधिकार मिले, लेकिन हर बजट में सिर्फ घोषणाएं होती हैं, ठोस निर्णय नहीं।मोर्चा व जन सुराज के संरक्षक दिनेश कुमार सिंह ने केंद्र सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यह बजट आमजन के खिलाफ है।उन्होंने कहा—जमालपुर कारखाना को उसका हक न मिलना इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार मजदूरों, कर्मचारियों और आम जनता की नहीं, बल्कि पूंजीपतियों की सरकार है। इस बजट ने साफ कर दिया है कि सरकार को न जमालपुर की चिंता है, न यहां के युवाओं की।”उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।एशिया का पहला कारखाना, फिर भी उपेक्षा क्यों?जमालपुर रेल निर्माण कारखाना केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं, बल्कि भारतीय रेल की आत्मा है।यहीं से रेल इंजीनियरिंग की परंपरा शुरू हुई।यहीं से देश को तकनीकी दक्षता मिली।लेकिन आज वही कारखाना संसाधनों की कमी, अनिश्चित भविष्य और राजनीतिक उपेक्षा का शिकार है।संघर्ष मोर्चा का आरोप है कि जानबूझकर जमालपुर को कमजोर किया जा रहा है ताकि निजी कंपनियों और बड़े कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाया जा सके।मोर्चा के सह-संयोजक कन्हैया सिंह और प्रवक्ता रविकांत झा ने कहा कि अमृत भारत योजना के नाम पर स्टेशन विकास की बातें सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।उन्होंने कहा—रेल मंत्री के जमालपुर आगमन पर 140 करोड़ रुपये की घोषणा की गई थी, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि यह राशि इस क्षेत्र के लिए ऊंट के मुंह में जीरा के समान है। इससे न तो रोजगार बढ़ेगा, न औद्योगिक विकास होगा।”उनका कहना था कि सरकार जानबूझकर जमालपुर को छोटे-छोटे टुकड़ों में राहत देकर आंदोलन को ठंडा करना चाहती है, लेकिन मोर्चा अब चुप नहीं बैठेगा।प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह लड़ाई सिर्फ बजट की नहीं, बल्कि सम्मान, पहचान और अस्तित्व की लड़ाई है।जमालपुर के युवाओं को रोजगार चाहिए, कारखाना को विस्तार चाहिए, लेकिन सरकार की प्राथमिकता में जमालपुर कहीं नहीं हैसंघर्ष मोर्चा ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने जल्द ही—जमालपुर रेल निर्माण कारखाना को निर्माण इकाई का दर्जा नहीं दिया पूर्व मध्य रेलवे में शामिल करने की घोषणा नहीं की,बड़े पैमाने पर निवेश और रोजगार की योजना नहीं लाई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र होगा।प्रदर्शन में मीडिया प्रभारी मनोज क्रांति, कोर कमेटी के नेता मिथलेश यादव, राजकुमार शर्मा, अमिताभ कश्यप, मो. आजम, रामनाथ राय, सत्यजीत पासवान, डॉ. सुधीर गुप्ता, आशीष कुमार, दिनेश साहू, गौरव यादव, अशोक शर्मा, चंदन साहू, सदानंद शर्मा, सुरेन्द्र साहू, संतोष कुमार, संजीव महतो, देवन यादव सहित सैकड़ों लोग शामिल थे।2026–27 का रेल बजट जमालपुर के लिए एक बार फिर निराशा का बजट साबित हुआ है।संघर्ष मोर्चा का कहना है कि अब झुनझुने से काम नहीं चलेगा।अगर सरकार ने जमालपुर की अनदेखी जारी रखी, तो यह आंदोलन सिर्फ रेल नगरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे बिहार में गूंजेगा।
