मुंगेर-संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल के आह्वान पर ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन (एआईकेकेएमएस) के बैनर तले गुरुवार को मुंगेर की सड़कों पर किसानों, खेत मजदूरों और नौजवानों का गुस्सा फूट पड़ा। सैकड़ों की संख्या में जुटे प्रदर्शनकारियों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और कथित जन-विरोधी कानूनों के खिलाफ जोरदार मार्च निकालते हुए केंद्र सरकार की नीतियों को किसान विरोधी करार दिया।
विरोध मार्च पूरबसराय स्टेशन के समीप से शुरू हुआ और शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए शहीद चौक पहुंचा, जहां सभा आयोजित की गई। पूरे शहर में “भारत-अमेरिका व्यापार समझौता वापस लो”, “कॉरपोरेटपरस्ती बंद करो”, “नई बीज नीति रद्द करो”, “एमएसपी की कानूनी गारंटी दो”, “बिजली विधेयक 2025 वापस लो”, “किसानों का कर्ज माफ करो” जैसे नारों की गूंज सुनाई देती रही। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि सरकार देश की खेती-किसानी को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों बेचने पर आमादा है।
जुलूस का नेतृत्व जिला सचिव भरत मंडल और अध्यक्ष रविंद्र मंडल ने संयुक्त रूप से किया। सभा को संबोधित करते हुए एआईकेकेएमएस के बिहार राज्य सचिव कृष्णदेव शाह ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 3 फरवरी 2026 को अंतिम रूप दिया गया भारत-अमेरिका व्यापार समझौता देश के किसानों के साथ खुला विश्वासघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि संसद सत्र के दौरान और केंद्रीय बजट के तुरंत बाद इस समझौते को अंतिम रूप देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान है।
उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों पर टैरिफ घटाए या समाप्त किए जाते हैं तो भारतीय बाजार में विदेशी सामान की बाढ़ आ जाएगी। इससे देश के लाखों छोटे और मध्यम किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएंगे। “टैरिफ किसानों का सुरक्षा कवच था, जिसे हटाकर सरकार किसानों को वैश्विक कंपनियों के सामने असुरक्षित छोड़ रही है,” उन्होंने कहा। उन्होंने दावा किया कि इससे डेयरी क्षेत्र पर सबसे बड़ा संकट आएगा, जहां करोड़ों ग्रामीण परिवार अपनी आजीविका के लिए निर्भर हैं।
वक्ताओं ने नई बीज नीति को भी किसान विरोधी बताते हुए कहा कि इससे बीज पर कॉरपोरेट कंपनियों का एकाधिकार बढ़ेगा और किसान पारंपरिक बीज अधिकारों से वंचित हो जाएंगे। एमएसपी को कानूनी गारंटी देने की मांग दोहराते हुए उन्होंने कहा कि बिना कानूनी सुरक्षा के किसानों को उनकी उपज का न्यायसंगत मूल्य नहीं मिल सकता। उन्होंने 2025 के प्रस्तावित बिजली विधेयक को भी जनविरोधी बताते हुए कहा कि इससे कृषि लागत और बढ़ेगी।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि देश का किसान पहले ही बढ़ती लागत, प्राकृतिक आपदाओं और बाजार की अनिश्चितता से जूझ रहा है। ऐसे समय में विदेशी उत्पादों के लिए दरवाजे खोलना आत्मघाती कदम है। उन्होंने किसानों के संपूर्ण कर्ज माफी की मांग की और कहा कि यदि सरकार ने समझौता वापस नहीं लिया तो आंदोलन को और व्यापक एवं तीव्र किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि किसान और मजदूर चुप बैठने वाले नहीं हैं। उन्होंने देशभर के किसान संगठनों, मजदूर यूनियनों, छात्र-युवा संगठनों और आम जनता से एकजुट होकर संघर्ष तेज करने की अपील की। सभा में उपस्थित नेताओं ने कहा कि यह लड़ाई केवल एक समझौते के खिलाफ नहीं, बल्कि देश की खेती, खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा की लड़ाई है।
सभा में नारायण यादव, कामेश्वर रंजन, सुधीर यादव, भुवनेश्वर तांती, शेखर तांती, उत्तम दास, रामचंद्र मंडल, विश्वनाथ मंडल, मंटू यादव, वकील यादव सहित बड़ी संख्या में किसान और कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का समापन संघर्ष को तेज करने के संकल्प के साथ हुआ।
संगठन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि सरकार यदि किसान और मजदूर विरोधी नीतियों को वापस नहीं लेती है तो आने वाले दिनों में आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
